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Thursday, January 20, 2011

दिलों के फासले से दूरियां रखना...!

दूरियां रास्तों की हो तो कोई हर्ज नहीं,
दिलों के फासले से आप दूरियां रखना।


मिलेगी रौशनी हजारों चरागों वाली,
न भूलना दीये से यारियां रखना ।। 


जुर्म के आम झूलते झूठ के पेड़ों पर,
हाथ में सत्य की आरियां रखना ।।

लगे न दाग, ना दामन कभी ये मैला हो,
कपड़ों पे मेहनत की कारियां रखना ।।  

छीन लें किसी का हक़ न 'देव' ऐसा हो,
मेरे पास चाहे तो लाचारियां रखना ।।

- देवेश

Wednesday, November 17, 2010

मेरी कामना... सदा के लिए...!!!


मांग रहा हूं मैं ईश्वर से, जग में बढ़े तुम्हारा मान ।
तनबल-धनबल-बुद्धि-रूपबल, ज्ञान-विवेक-तेज-सम्मान ।।
सूरज नौकर, चंदा चाकर, तारे सब हों दास-दासियां ।
सागर से भी बड़ा आपका, हे प्रियवर! हो पुण्य वितान*...।।

   *वितान - विस्तार/शामियाना


Saturday, October 23, 2010

मुलाकात

आज महीनों बाद लिखने का मन किया है। कुछ ज्ञात-अज्ञात कारण भी हैं इसके पीछे। वैसे भी यह काम किसी और के लिए साहित्य की सेवा, सरस्वती की उपासना, समाज को दिशा देने-दिखाने का प्रयास अथवा ऐसा ही कुछ हो सकता है, लेकिन मेरा ऐसे किसी उद्देश्य ऐसे किसी शब्द से कोई वास्ता नहीं है। मेरी तुकबंदियां मेरे लिए सिर्फ और सिर्फ अपनी भावनाओं के इजहार का जरिया भर है। शब्दों के जाल में उलझना-उलझाना तब तक चलता रहेगा, जब तक मन में एहसास जिंदा हैं। फिलहाल इसे पढ़िए:-


चेहरे पे उसके अब वो उजाला नहीं रहा ।
मेहनत की रोटियों का निवाला नहीं रहा ।।


कल वो मिला था मुझको अर्से के बाद में ।
मिलने में मगर उसके रसाला नहीं रहा ।।

कुछ और फड़कती हुई खबर लाईए ।
'कलमाड़ियों' में कोई मसाला नहीं रहा ।।

- देवेश

Thursday, May 13, 2010

देवकीनन्दन सहित सात पत्रकारों को केन्स पत्रकारिता पुरस्कार

उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए राजस्थान के सात पत्रकारों का केन्स पत्रकारिता पुरस्कारों के लिए चयन किया गया है। पुरस्कारों की घोषणा गत 9 मई को कंज्यूमर्स एक्शन एण्ड नेटवर्क सोसायटी (केन्स) अध्यक्ष डा. अनंत शर्मा ने की।
ये पुरस्कार 15 मई को जयपुर के पिंकसिटी प्रेस क्लब सभागार में केन्स की ओर से आयोजित समारोह में दिए जाएंगे। इनमें जयपुर के गिरिराज अग्रवाल, सुनील सिंह सिसोदिया व आलोक शर्मा, सीकर के सिकंदर पारीक, जोधपुर के देवकीनन्दन व्यास, बीकानेर के राकेश आचार्य व झुंझुनूं के मधुसूदन शर्मा शामिल हैं। राजस्थान पत्रिका जोधपुर संस्करण के उप सम्पादक देवकीनन्दन इससे पहले "कलमवीर पुरस्कार" से सम्मानित हो चुके हैं।

Tuesday, January 19, 2010

ग़ज़ल

अपने दिल की कही दीवानी कर ले तू ।
बिखरी बातें जोड़ कहानी कर ले तू ।।

कल बिछुडऩ की धूप सहेंगे हम दोनों ।
आज प्रेम की छांव सुहानी कर ले तू ।।

गजलें, कविता, गीत, रूबाई रुस्वां हैं ।
देकर इनको छुअन 'मनानी' कर ले तू ।।

दूर-दूर से मिलना भी ये कैसा मिलना ?
मेरे घर भी आनी-जानी कर ले तू ।।

आंखों-आंखों में कितना बतियाएंगे ।
थोड़ी-थोड़ी बात जुबानी कर ले तू ।।

मत रूठो, मैं हाथ जोड़ता हूं तुमको ।
फिर से आकर प्रीत पुरानी कर ले तू ।।

झूठा, दुष्ट, फरेबी हूं, तो भी तेरा हूं ।
इसी बात से यार 'निभानी' कर ले तू ।।

अब तो मेरा रोना भी नामुमकिन है ।
सब कहते हैं बात सयानी कर ले तू ।।

मिलकर तुझमें 'देव' तुझी सा बन जाए ।
पानी जैसा मुझको पानी कर ले तू ।।

- देवेश